The Most Amazing & Motivational Shivir in the History of Sikar by Munishree Tarun Sagarji Maharaj at Prince Eduhub.


सीकर के इतिहास का अदभुत कार्यक्रम : प्रिंस एजुहब के 15000 विद्यार्थियों ने तल्लीनतापूर्वक सुना मुनिश्री तरुण सागरजी के ओजस्वी प्रेरक, वीर कवि एवं हास्य कवि के रूप में प्रेरणादायी उद्बोधन को

बेवकूफ बच्चे पैदा होने बंद हो गये हैं; पिता पाठ पढ़ाता है, ससुर पट्टी पढ़ाता है।

           प्रख्यात संत श्री तरुण सागरजी महाराज ने 31 अक्टूबर, 2017 को प्रात: 08.30 बजे जयपुर-बीकानेर बाईपास रोड स्थित प्रिंस एकेडमी कैम्पस में प्रिंस एजुहब के 15000 विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को विद्यार्थी संस्कार एवं प्रेरणा शिविर में सम्बोधित किया। स्वयं तरूण सागर जी महाराज के अनुसार सीकर

           चतुर्मास प्रवास का यह सबसे बड़ा कार्यक्रम आयोजित हुआ हैं। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि आज के नवयुवक अपने जन्म देने वाले को पिता कहते है जबकि ससुर को पिताजी कहते हैं। पिता जीवन जीने का पाठ पढ़ाता है जबकि ससुर होशियारी की पट्टी पढ़ाता है। विद्यार्थी को सफलता हासिल करने के लिए एक ही शब्द में विश्वास रखना चाहिए और वह शब्द कोशिश, फिर से कोशिश लगातार कोशिश।

           आज के जमाने में बेवकूफ बच्चे पैदा होने बंद हो गये हैं लेकिन माता-पिता के लिए होशियार बच्चे की बजाय समझदार बच्चा ज्यादा आवश्यक है।

           उन्होंने बस ड्राइवर के उदाहरण के माध्यम से राजनेताओं पर व्यंग्य किया कि बस में सफर कर रहे यात्री सफर के दौरान सो जाये तो कोई बात नहीं लेकिन ड्राइवर ही सो जायें तो आप समझ सकते हैं कि यात्रियों का क्या हाल होगा।

           मुनिश्री ने कहा कि आज के युग में विद्यार्थियों को सीखना चाहिए कि वे खून की कमाई के बजाय, खून पसीने की कमाई खायें। उन्होंने कहा कि वर्तमान में गौसेवा की बजाय विभिन्न रूपों में कुत्ता कल्चर प्रभावी होती जा रही है। महाराज ने ‘बापू ये क्या हो रिया है’, ‘हमारे यहाँ ताजी मिठाईयाँ मिलती हैं’ आदि व्यंग्यों के माध्यम से चुटकी लेते हुये विद्यार्थियों को हँसी से लोट-पोट कर दिया। उन्होंने 15000 विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को 3 शपथ भी दिलाई। प्रथम देश के साथ गद्दारी नहीं करने, द्वितीय अपने माता-पिता एवं सास-ससुर को वृद्धाश्रम नहीं भेजने एवं तृतीय किसी भी विषम परिस्थिति में आत्महत्या नहीं करने की शपथ दिलाई।

           संस्कार शिविर में तरुण सागरजी महाराज के संगस्थ सतीश भैयाजी के सानिध्य में प्रिंस एजुहब के निदेशक जोगेन्द्र सुण्डा, चेयरमैन डॉ. पीयूष सुण्डा, प्रबंध निदेशक रमाकांत स्वामी, प्रबंध निदेशक राजेश ढिल्लन आदि ने महाराज को श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। एक घण्टे के प्रवचन के बाद विद्यार्थियों को प्रेरित करने के लिए विद्यार्थियों के सामने ही आहारचर्या रखी गयी।


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